प्रसव से पहले कल्पना की आखिरी गुहार, कुछ घंटों बाद जच्चा-बच्चा दोनों की मौत

 

रीवा के गांधी स्मारक चिकित्सालय का दर्दनाक मामला; 25 वर्षीय
कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया, उच्चस्तरीय जांच शुरू

रीवा, मध्य प्रदेश। गांधी स्मारक चिकित्सालय, रीवा में प्रसव के लिए भर्ती 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है।

पहली डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंची थीं कल्पना

जानकारी के अनुसार, कल्पना मिश्रा को 26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 2:38 बजे गांधी स्मारक चिकित्सालय, रीवा के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। यह उनकी पहली डिलीवरी थी।

पोस्टर में दी गई जानकारी के मुताबिक, उपचार के दौरान उसी दिन रात करीब 11:55 बजे कल्पना और उनके नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया।

मौत से कुछ घंटे पहले का वीडियो आया सामने

मामले में सबसे भावुक पहलू कल्पना का मौत से पहले का बताया जा रहा एक वीडियो है। इसमें वह रोते हुए अपने परिजनों से मदद की गुहार लगाती दिखाई दे रही हैं। पोस्टर के अनुसार, यह वीडियो उनकी मौत से कुछ घंटे पहले का है।

वीडियो सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

भर्ती के समय क्या थी स्थिति?

पोस्टर में उपलब्ध विवरण के अनुसार, अस्पताल में भर्ती के समय कल्पना की प्लेटलेट संख्या लगभग 30,000 प्रति माइक्रोलीटर बताई गई थी। इसके अलावा अत्यधिक बढ़ा हुआ रक्तचाप और लिवर एंजाइम बढ़े होने की बात भी कही गई है।

चिकित्सकीय जांच में गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया और HELLP Syndrome जैसे लक्षण मिलने का उल्लेख किया गया है।

इन स्थितियों की वास्तविक गंभीरता, उपचार की समयरेखा और मौत से इनके संबंध की पुष्टि विस्तृत चिकित्सकीय जांच एवं मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही हो सकेगी।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

परिजनों का आरोप है कि कल्पना की बिगड़ती हालत को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया और उचित उपचार उपलब्ध कराने में देरी हुई। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज और बेहतर प्रबंधन मिलता तो संभवतः जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाई जा सकती थी।

परिवार ने उपचार में कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई

पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, मामले के सामने आने के बाद ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल (प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग) और डॉ. निधि पांडे (निवेदना विभाग) को प्रथम दृष्टया लापरवाही के आरोप में निलंबित किए जाने का उल्लेख है।

इसके अलावा ड्यूटी पर मौजूद दो नर्सिंग अधिकारियों को कथित दुर्व्यवहार के आरोप में निलंबित किए जाने की बात भी कही गई है। जांच पूरी होने तक संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किए जाने का भी उल्लेख है।

पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति

मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने की जानकारी दी गई है।

पोस्टर के मुताबिक, समिति की अध्यक्षता डॉ. बीनू कुशवाहा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं निदेशक, चिकित्सा एवं शिक्षा, कर रही हैं। जांच समिति में स्वास्थ्य सेवाओं, पैथोलॉजी, ब्लड बैंक, प्रसूति एवं स्त्री रोग तथा नवजात चिकित्सा से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की बात कही गई है।

समिति को तीन दिनों के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिए जाने का उल्लेख है।

पोस्टमार्टम और मौत के वास्तविक कारण की जांच

परिवार की मांग पर कल्पना और उनके नवजात शिशु का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज, रीवा की संयुक्त टीम द्वारा कराए जाने की जानकारी दी गई है।

मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिकॉर्ड के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही स्पष्ट होने की बात कही गई है।

कई अहम सवालों के जवाब अभी बाकी

इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं—कल्पना इतनी गंभीर स्थिति में कैसे पहुंचीं? क्या उनकी बिगड़ती हालत को समय रहते पहचाना गया? इमरजेंसी में आवश्यक उपचार समय पर दिया गया या नहीं? क्या उपचार के प्रत्येक चरण में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया? और क्या किसी स्तर पर हुई चूक ने जच्चा-बच्चा की जान बचाने की संभावना को प्रभावित किया?

इन सवालों के जवाब निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

परिवार की मांग

पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच, दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रसूता महिलाओं के लिए बेहतर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।

यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी तक सीमित नहीं है। जांच से यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि कल्पना और उनके नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इलाज के दौरान किसी स्तर पर ऐसी चूक हुई जिसे रोका जा सकता था। अंतिम जिम्मेदारी जांच और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।

भावपूर्ण श्रद्धांजलि — कल्पना मिश्रा एवं उनके नवजात शिशु को।

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