हवालात के गेट पर बेसुध पड़ा दिखा युवक; परिजनों ने पुलिस पर
मारपीट का लगाया आरोप, पुलिस ने किया इनकार—पोस्टमार्टम में मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया
बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के दातागंज कोतवाली में पुलिस हिरासत में लिए गए करीब 28 वर्षीय राजेश की तबीयत बिगड़ने और बाद में अस्पताल में उसकी मौत होने का मामला गंभीर सवालों के घेरे में है। मामले से जुड़े CCTV फुटेज सामने आने के बाद हिरासत के दौरान राजेश की स्थिति और उसके साथ हुई घटनाओं को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, राजेश को एक मामले में पुलिस हिरासत में लिया गया था। CCTV फुटेज में वह हवालात के गेट के पास जमीन पर बेसुध अवस्था में पड़ा दिखाई देता है। फुटेज में पुलिसकर्मी उसके पास जाते, उसे उठाने की कोशिश करते और पानी पिलाते हुए भी नजर आते हैं।
हालांकि, वीडियो अपने आप में यह स्पष्ट नहीं करता कि राजेश की हालत किस कारण बिगड़ी। यही कारण है कि हिरासत से पहले और हिरासत के दौरान हुई घटनाओं की पूरी समयरेखा की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परिवार का आरोप—हिरासत में की गई मारपीट
राजेश के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि जब राजेश को लेकर गए थे तब वह पूरी तरह ठीक था। ऐसे में हिरासत के दौरान उसकी हालत अचानक कैसे बिगड़ी, इसकी जांच होनी चाहिए। परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CCTV फुटेज और हिरासत से संबंधित सभी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
पुलिस ने मारपीट के आरोपों से किया इनकार
पुलिस का कहना है कि राजेश को प्रारंभिक कार्रवाई के बाद हिरासत में लिया गया था और हिरासत के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
पुलिस ने हिरासत में मारपीट किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम में मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
CCTV फुटेज में क्या दिखाई देता है?
सामने आए CCTV दृश्यों में अलग-अलग समय पर राजेश को हवालात के आसपास देखा जा सकता है। पोस्टर में दर्शाए गए घटनाक्रम के अनुसार—
राजेश हवालात के गेट के बाहर जमीन पर बेसुध अवस्था में पड़ा दिखाई देता है।
कुछ देर पहले के फुटेज में वह जमीन पर पड़ा है और गेट खुला दिखाई देता है।
एक पुलिसकर्मी उसके पास पहुंचकर उसे उठाने की कोशिश करता नजर आता है।
पुलिसकर्मी बोतल से उसे पानी पिलाने का प्रयास करता दिखाई देता है।
एक अन्य व्यक्ति कपड़े से हवा करता नजर आता है और पुलिसकर्मी मदद करते दिखाई देते हैं।
इन दृश्यों से राजेश की बिगड़ी हुई हालत दिखाई देती है, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ने की वास्तविक वजह का अंतिम निष्कर्ष केवल CCTV फुटेज के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
विवाद की पृष्ठभूमि
पोस्टर में दी गई जानकारी के मुताबिक, घटना से पहले गांव में भंडारे के दौरान डीजे पर गाना बजाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। बाद में मामला कथित रूप से मारपीट में बदल गया।
बताया गया है कि पुलिस मौके पर पहुंची और राजेश सहित कुछ लोगों को थाने ले गई। राजेश से संबंधित एक अन्य मामले में भी कार्रवाई की बात कही गई है। इन घटनाओं और हिरासत में उसकी तबीयत बिगड़ने के बीच की परिस्थितियों की जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अस्पताल पहुंचने के बाद मौत
पुलिस के अनुसार, राजेश की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे चिकित्सकीय उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टर में दी गई जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है। हालांकि, कार्डियक अरेस्ट अपने आप में हृदय की धड़कन बंद होने की स्थिति को दर्शाता है; इसलिए परिस्थितियों की व्यापक जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, चोटों की स्थिति, उपचार के समय और अन्य चिकित्सकीय तथ्यों का परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है।
दूसरे पक्ष के खिलाफ भी हत्या का मामला
मामले की पृष्ठभूमि से जुड़े विवाद में दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ भी हत्या से संबंधित मामला दर्ज किए जाने की बात पोस्टर में कही गई है। पुलिस द्वारा इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
इस पहलू का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल
राजेश की मौत के बाद कई सवालों के जवाब जांच से सामने आने आवश्यक हैं—उसकी हालत पहली बार कब बिगड़ी? उस समय हवालात में कौन-कौन मौजूद था? पुलिस ने स्थिति की गंभीरता कब महसूस की? डॉक्टर या एम्बुलेंस को कब बुलाया गया? राजेश को अस्पताल कब और कितने समय में पहुंचाया गया? क्या CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड की समयरेखा एक-दूसरे से मेल खाती है? और क्या उसके शरीर पर ऐसी चोटें थीं जिनकी अलग से चिकित्सकीय व्याख्या आवश्यक है?
निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी रिकॉर्ड
मामले की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए थाने का पूरा CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस स्टेशन की जनरल डायरी, हिरासत और अस्पताल पहुंचाने के समय से संबंधित रिकॉर्ड तथा घटना के समय मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हिरासत में मौत के मामलों में पारदर्शिता जरूरी
पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में आरोप और प्रत्यारोप के बजाय उपलब्ध CCTV फुटेज, चिकित्सकीय साक्ष्य, आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही किसी निष्कर्ष तक पहुंचना उचित है।
सामने आया CCTV फुटेज राजेश की गंभीर हालत को जरूर दर्शाता है, लेकिन यह अपने आप उसकी मौत के कारण का अंतिम प्रमाण नहीं है। निष्पक्ष जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना होना चाहिए कि राजेश की तबीयत किस वजह से बिगड़ी, उसे समय पर क्या चिकित्सा सहायता दी गई और हिरासत के दौरान उसके साथ वास्तव में क्या हुआ।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध पोस्टर में दी गई जानकारी, उसमें वर्णित CCTV दृश्यों, परिजनों के आरोप और पुलिस के बताए पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों को सिद्ध तथ्य न मानते हुए निष्पक्ष जांच और आधिकारिक निष्कर्ष की प्रतीक्षा आवश्यक है।
